मुझे मत मारो

मुझे मत मारो

मुझे मत मारो…
हे माँ मुझे मत मारो, मेरी जिंदगी सवारों,
कोख में तेरी पली हूं, फूलो की कली हूं।
जन्म मुझे लेने दो, प्रकृति की रचना को आने दो।
मत सोचो के भार बनूँगी, एक दिन कर्णधार बनूँगी,
अब खुद को उभारो माँ, मुझे मत मारो माँ।
सोचो जरा ? जब तुम भी होगी किसी के गर्भ मे ?
तुमको भी किसी ने पाला होगा?
वो तुम्हारे भी सपनों का रखवाला होगा।
तुमको भी तो खुशहली दी, अपने प्यार की प्याली दी,
मुझे इस दुनिया के रंग दिखाओ माँ,
मुझे इस दुनिया मे लाओ माँ,
मेरे सावलों को बताओ माँ ?
मुझे मत मारो माँ, मुझे मत मारो माँ ।।

“कविता को पढ़ने के लिए शुक्रिया, आपकी प्रतिक्रिया और उपस्थिति ही मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा है।”

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