अब भी आती है तुम्हारी खुशबू, उस किताब से
जो तुमने पढ़ी थी कभी, फूल रजनीगंधा के अंदाज से
शीशे में तो अक्सर नजर आता है चेहरा तुम्हारा,
कैसे मानू के, छोड़ कर चली गई हो अकेला मुझे
अपने प्यार और दुलार, के उस एहसास से।
अब भी आती है, तुम्हारी खनकती चूड़ियों की आवाज
साथ बिताए वो पल और वो हंसी,
आज भी ताज़ा है उसी अंदाज से।
बीत रहा समय, उलझ गई मेरी जिंदगी, ढल गई शाम,
के तारों की रोशनी अब भी आती है आसमान से।
कैसे मान लू, के तुम चली गई हो, चेतना के एहसास से
अब भी आती है तुम्हारी खुशबू, उस किताब से,
जो तुमने पढ़ी थी फूल रजनीगंधा के अंदाज से।
दिन बीत तो जाता है, पर रात नहीं कटती,
दिल में तो हमेशा तुम्हारी चाहत ही बसी रहेगी।
मैं आखिरी समय में भी तुमको याद करूंगा,
दरमियान उसी अंदाज से ।
मेरा जीना भी हो गया है मुश्किल,
तुम्हारी हंसी और वो छुवन, आज शामिल है।
मै कैसे भूल जाऊं तुमको, अपने उस एहसास से
अब भी आती है तुम्हारी खुशबू, उस किताब से,
जो तुमने पढ़ी थी कभी, फूल रजनीगंधा के एहसास से।
किसी की प्यारी याद में लिखी कविता………
