📬 आपके शब्दों की प्रतीक्षा में..

* मैं लखन महेंद्र वर्मा, तहे दिल आपका स्वागत और अभिनंदन करता हूँ *
जरूरी नहीं के, आप सिर्फ इसी मंच पर लिखे या पढ़ें। आप स्वतंत्र है आपने मन के मालिक हैं आपको जहां भी सुकून मिले, बस अपने मन की बात कह लीजिएगा। कोई न मिले तो अपने अंतर्मन से बात करिएगा और देखिएगा आपको सुकून मिलेगा।
यकीन मानीयें आपकी आवाज़, आपकी सोच और आपकी भावनाएँ किसी के लिए मायनें रखते हो, या ना रखते हो, लेकिन आप अपने लिए अमूल्य हैं।
✍️आपके लिए एक कविता ✍️
जब मन की बातों को, कोई सुनता नहीं,
जो कह न सके, वो लिख लेते हैं।
चुपके ,चुपके रो लेते है,
समय का पहिया चलता है, सारे पन्नें खो देते है।
अश्रु की बूंदें, जन मन में बहती है, कहने को कई बातें रहती है।
जब मन की बातों को, कोई सुनता नहीं,
जो कह न सके, वो लिख लेते हैं।
चुपके ,चुपके रो लेते है,
तो आइये , कुछ कहते है , कुछ सुनते है ,
इस मंच पर मिलते हैं — शब्दों के संग।
धन्यवाद
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