बेहया हो तुम, बेहया है हम
बेहया हो तुम, बेहया है हमतुम्हें मारा, तुम्हें रुलायातुम्हें प्रताड़ा, तुम्हें जलायातुम्हें सजाया, तुम्हें फसायाकिस मिट्टी की बनी हो तुम…तुम्हें क्या क्या नहीं कहा, तुमने क्या क्या नहीं सहातुम्हें सजाया,…
हर ठोकर सिखाती है कि अगली बार कहाँ संभलना है