यूं ही इत्तेफाकन नहीं होती, मुलाकात किसी से
यूं ही इत्तेफाकत नहीं होती, बात किसी से
कभी मिल जाना, कहीं पर इस अंदाज से
खुली जुल्फों को लहराना इस अंदाज से
ऐसी हो मुलाकात, जो भुलाए ना भूले
तेरा मचलना , तेरा इठलाना उसी अंदाज से
कुछ तो जरूर है, तेरे मेरे दरमियान
यह भी इत्तेफाकन हुआ बड़ा ही खास है ।
यूं ही इत्तेफाकन नहीं होती, मुलाकात किसी से
यूं ही इत्तेफाकन नहीं होती, बात किसी से ।।

